सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

25साल बाद भी दिल तड़पा देती है।

 


आइकॉनिक फिल्म ‘टाइटैनिक’ की रिलीज को आज 25 साल पूरे हो चुके हैं। 

19 /12 /1997 को रिलीज हुई इस फिल्म ने 11 ऑस्कर अपने नाम किए थे। 1912 में Southampton से पहली और आखिरी यात्रा में रवाना हुए, TITANIC पर बनी यह फिल्म उस समय दुनिया में बनी सबसे महंगी FILM थी। फिल्म के निर्देशक और लेखक James Cameroon थे, जो 'Avatar',


अवतार2


the way of water' 

और

 'द टर्मिनेटर


' जैसी फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। आज ‘टाइटैनिक’


      Silver jubilee 25 year

 के 25 साल पूरे होने पर हम आपको इससे जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं।

असली जहाज और फिल्म का सीन



असली TITANIC से 25से26 गुना ज्यादा फिल्म की कीमत है🤔

'TITANIC' एक एपिक ROMANCE और TRAGEDY वाली फिल्म है, जिसकी लागत असली टाइटैनिक शिप से 26 गुना ज्यादा की खबर थी। जेम्स कैमरून ने फिल्म को amazing बनाने के लिए काफी मेहनत की थी।

‌The replica of the Titanic ship in the film was made by looking at the blueprints of the original Titanic.


 

‌मूल टाइटैनिक के ब्लूप्रिंट को देखकर फिल्म में टाइटैनिक जहाज की प्रतिकृति बनाई गई थी। वहीं, फिल्म में दिखा सामान भी उन्हीं कंपनियों से तैयार करवाया गया था, जिन्होंने असल जहाज के लिए काम किया था। फिल्म में कई ऐसी घटनाएं भी दिखाई गई थी जो सच्ची थी। और बहुत से सीन भी क्रिएट भी किए गए। और फिल्म में जहाज को डूबता हुआ दिखाने के लिए मेकर्स ने एक सीन में (1 CRORE LITRE WATER) 1 करोड़ लीटर पानी का इस्तेमाल किया था, और बहुत से दूसरे, सीन्स में लाखों लीटर पानी लगा था। फिल्म को बनाने का खर्चा,

‌......(200 million Dollars) 


‌200 मिलियन डॉलर, यानी 1250 करोड़ का खर्च आया। फिल्म के हर एक मिनट के सीन में 8 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिससे डायरेक्टर और डिस्ट्रीब्यूटर के बीच अनबन भी हुई।



टाइटैनिक जहाज
असली फुटेज के लिए करनी पड़ी मेहनत,

JAMES CAMEROON जब फिल्म का आइडिया लेकर 20 century fox स्टूडियो के पास गए, तो पहले वो ट्रेजडी पर love story जोड़ने वाली बात नहीं समझे, लेकिन बाद में जेम्स उन्हें मनाने में सफल हो गए। इसके बाद जेम्स कैमरून ने स्टूडियो से (Antarctica oceans) अंटार्कटिक ओशन में डूबे असली टाइटैनिक के फुटेज इकट्ठा करने के लिए पैसे मांगे। जितने रुपये वो नकली टाइटैनिक का रैक बनाने में खर्च करते, उसमें 30 % बढ़ाकर असल टाइटैनिक के फुटेज निकालने के लिए बजट बना। 1995 में जेम्स 12,500 फीट गहराई में लगभग 12 बार सबमरीन के सहारे फुटेज लेने के लिए गए। जहां एक गलती होने पर किसी की जान भी जा सकती थी। काफी परेशानियों के बाद भी जेम्स असली टाइटैनिक की फुटेज लाने में कामयाब हो गए और उसे फिल्म में भी दिखाया गया। फिल्म को और बेहतरीन बनाने के लिए जेम्स ने 6 महीनों तक इस घटना में बचे लोगों पर जानकारियां इकट्ठा किया था।



जेम्स कैमरून ने रोज की पेंटिंग बनाई थी।

फिल्म में दिखाया गया है कि जैक रोज की पेंटिंग बनता है,असल में इस पेंटिंग को जेम्स ने बनाया था। दरअसल, 31 जुलाई 1994 को फिल्म की प्रिंसिपल फोटोग्राफी शुरू थी। इसके बाद 15 नवंबर को शिप की रवानगी का सीन शूट हुआ। फिल्म का पहला सीन रोज की पेंटिंग थी, जो डायरेक्टर जेम्स कैमरून ने बनाई थी। यह पहला सीन इसलिए था क्योंकि सेट फैला हुआ था कि दूसरा सीन शूट नहीं हो सकता था। ऐसे मे इसी सीन को शूट किया गया। वहीं, शूटिंग के दौरान सितारों को भी काफी दिक्कत हुई थी। कई लोगों को कोल्ड, फ्लू और किडनी इन्फेक्शन हो गया था। वहीं, ठंडे पानी में शूट करते हुए केट विंसलेट को hypothermia हो गया था। इतना ही नहीं क्लाइमैक्स (climax)के दौरान केट को pneumonia भी हो गया था।

 केटजेम्स कैमरून से डरती थीं 

केट विंसलेट को शूटिंग के दौरान जेम्स कैमरून से डर लगता था, क्योंकि वो परफेक्ट शॉट के लिए चिल्लाते थे। जेम्स की सख्ती से परेशान होकर केट ने तय कर लिया था कि वो उनके साथ तब तक काम नहीं करेंगी, जब तक वो अमीर नहीं हो जातीं। इतना ही नहीं केट डरती थीं कि टाइटैनिक डूबने वाले शॉट को फिल्माते हुए वो डूब कर मर जाएंगी। वहीं, शूटिंग करना इतना आसान नहीं था। इस शूटिंग के दौरान तीन स्टंटमैन की हड्डियां टूट गई थीं। और कई लोग फिल्म छोड़कर ही भाग निकले थे शायद वो डर गए थे।


टाइटैनिक जहाज की एक असली तस्वीर को देखकर क्रिएट किया गया सीन -


फिल्म को ब्लूप्रिंट की मदद से बनाया था सेट, और कई असली किरदार को दर्शाया गया था

टाइटैनिक फिल्म को बनाने के लिए पहले टाइटैनिक जहाज के असली ब्लूप्रिंट का इस्तेमाल किया था। वहीं, फिल्म में कई फिक्शनल किरदार के अलावा वह कई असली किरदार भी थे, जो उस शिप में मौजूद थे। जैसे कि नई-नई अमीर बनीं मार्ग्रेट मॉली ब्राउन, जिसका किरदार कैथी बेट्स ने निभाया था। इनमें शिप बनाने वाले बिल्डर विक्टर गार्बर, कैप्टन बेनार्ड हिल भी शामिल थे। फिल्म में 1912 की high class society के लोगों का सही रवैया दिखाने के लिए मैनर्स इंस्ट्रक्टर 24 घंटे सेट पर मौजूद रहता था। इतना ही नहीं रॉयल क्लास के लोगों को दिखाने के लिए विशाल बेलूगा मछली के अंडों से बनी दुनिया की सबसे महंगी डिशेज में से एक को डायनिंग टेबल वाले सीन में रखा गया था। इसकी कीमत उस समय 4500 डॉलर प्रति पाउंड थी।

तो दोस्तों इस हिस्टोरिकल स्टोरी से आपको क्या सीख मिला? मैंने तो यह सीखा कि किसी भी चीज के लिए किसी भी चीज को जानकारी के लिए या किसी भी इतिहास को खंगालने के लिए और उसको फिल्माइज करने के लिए इसको लोगों के सामने लाने के लिए भी बहुत खर्चे लगते हैं शायद इस दौर में और ज्यादा लगते हैं लेकिन सच्चाई को लाने के लिए या उसको सही रूप से लोगों के सामने पेश करने के लिए खर्चा तो लगता ही है लेकिन लोगों का अगर प्यार मिल जाए तो खर्चा कुछ ज्यादा नहीं होता।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

LIVE SCORE ANY TIME

Live Cricket Scores

दुबई में दुनियां का सबसे बड़ा AI तकनीक का मेला

  Watch video 🔗 दुबई टेक शो AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसे ऐसे काम कर रही है कि जिसे देखकर दुनिया दंग रह जायेगी, AI ऐसा ही दम आजकल दुबई के एक techshow में दिख रहा है जिसमें ऐसी ऐसी टेक्नोलॉजी वाली चीज दिखाई गई की सब शॉक्ड रह गए सबसे पहले दुबई पुलिस की ये जेट कार देखिए । यह पानी में तैरने वाली जेट कार है जो जमीन पर ही नहीं बल्कि पानी में भी चल सकती है  जमीन पर इस कार की रफ्तार 120 किलोमीटर पानी में तैरने वाली जेट कार है जो जमीन में ही नहीं बल्कि पानी में भी चल लेती जमीन पर इस कर की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा है तो पानी में भी है 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को पकड़ लेती है।  पुलिस पीछे चल रही है और क्रिमनल सोचा कि मैं उतर जाऊंगा पानी में पुलिस बोली लो मैं भी आता हूं यानी ऐसी जेट कार को चलाने के लिए ड्राइवर जरूरी है लेकिन ऐसी कार भी दिखाई गई इस जगह पर  जो ड्राइवरलेस और पुलिस का काम करती दुबई पुलिस के पास एक नहीं बल्कि दो अलग-अलग तरीके की सेल्फ कंट्रोल कार दिखाई गई । यह कार रिहायशी इलाकों में निगरानी के लिए तैनात की जाती है   यह कार चारों दिशाओं पर अपनी न...

गौहर जान , एतिहासिक Story

  आज इतिहास के पन्नों को पलटते हुए हम बात करेंगे गौहर जान की।   वही गौहर जान जिनको भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार कहा जाता है। 26 जून, 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पैदा हुईं गौहर जान क्रिश्चियन थीं। उनका असली नाम एंजेलीना योवर्ड था और वह आर्मेनिया मूल की थीं। उनकी मां का नाम विक्टोरिया हेम्मिंग्स और पिता का नाम विलियम योवर्ड था। गौहर जब 6 साल की थीं, तब उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने बेटी के साथ इस्लाम धर्म अपना लिया। इतिहास के पन्नों में एक बार??  गोहर जान नाम की एक महिला थी।  वह एक लोकप्रिय भारतीय शास्त्रीय संगीतकार और नृत्यांगना थीं, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण आवाज और मोहक भावों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  उनका नाम संगीत और नृत्य की दुनिया में उत्कृष्टता का पर्याय बन गया है। तकरीबन 20 से ज़्यादा भाषाओं में ठुमरी से लेकर भजन तक गाने वाली गौहर जान भारत की पहली गायिका थीं, जिन्होंने भारतीय संगीत के इतिहास में अपने गाए गानों की रिकॉर्डिंग कराई थी। यही वजह है कि उन्हें 'भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार' का दर्जा मिला है। गौहर...